श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 5: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.5.12 
स्वस्रीयं निहतं श्रुत्वा दु:खं स्वपिति केशव:।
कृतागसो वयं तस्य स मदर्थं कथं क्षमेत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अपने भतीजे अभिमन्यु के मारे जाने का समाचार सुनकर कृष्ण चैन से सो नहीं पा रहे हैं। हम सब उनके अपराधी हैं, फिर वे हमें कैसे क्षमा कर सकते हैं?
 
‘Krishna cannot sleep peacefully after hearing the news of his nephew Abhimanyu being killed. We all are his criminals, then how can he forgive us?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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