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विललाप च यत् कृष्णा सभामध्ये समेयुषी।
न तन्मर्षयते कृष्णो न राज्यहरणं तथा॥ १०॥
अनुवाद
द्रौपदी को बलपूर्वक राजसभा में लाकर जो विलाप किया गया तथा जिस प्रकार पाण्डवों का राज्य उनसे छीन लिया गया, ऐसा आचरण कृष्ण सहन नहीं कर सकते ॥10॥
The lamentation shown by Draupadi after she was forcibly brought to the court and the way in which the kingdom of the Pandavas was taken away from them, Krishna cannot tolerate such behaviour. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥