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mahabharat 9.49.24: महातपस्वी असितदेवल ऋषि ने उसी तीर्थ में परमयोग का आश्रय लेकर योगसिद्धि प्राप्त की थी ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 9.49: इन्द्रतीर्थ, रामतीर्थ, यमुनातीर्थ और आदित्यतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 49: इन्द्रतीर्थ, रामतीर्थ, यमुनातीर्थ और आदित्यतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  9.49.24 
असितो देवलश्चैव तस्मिन्नेव महातपा:।
परमं योगमास्थाय ऋषिर्योगमवाप्तवान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी असितदेवल ऋषि ने उसी तीर्थ में परमयोग का आश्रय लेकर योगसिद्धि प्राप्त की थी ॥24॥
 
The great ascetic Asit Deval Rishi had attained Yogasiddhi by taking shelter of Param Yoga in the same pilgrimage. 24॥
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवतीर्थयात्रायां सारस्वतोपाख्याने एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलदेवजीकी तीर्थयात्राके प्रसंगमें

सारस्वतोपाख्यानविषयक उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४९॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)