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mahabharat 9.49.19-21h: प्रजानाथ! उसी नदी के तट पर इन्द्र, विश्वेदेव, मरुद्गण, गन्धर्व, अप्सराएँ, द्वैपायन व्यास, शुकदेव, मधुसूदन, श्रीकृष्ण, यक्ष, राक्षस और पिशाच आदि सभी देवता तथा हजारों की संख्या में अन्य मनुष्य भी योग में निपुण हुए हैं। 19-20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.49: इन्द्रतीर्थ, रामतीर्थ, यमुनातीर्थ और आदित्यतीर्थकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 49: इन्द्रतीर्थ, रामतीर्थ, यमुनातीर्थ और आदित्यतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 19-21h
 
 
श्लोक  9.49.19-21h 
तस्या नद्यास्तु तीरे वै सर्वे देवा: सवासवा:।
विश्वेदेवा: समरुतो गन्धर्वाप्सरसश्च ह॥ १९॥
द्वैपायन: शुकश्चैव कृष्णश्च मधुसूदन:।
यक्षाश्च राक्षसाश्चैव पिशाचाश्च विशाम्पते॥ २०॥
एते चान्ये च बहवो योगसिद्धा: सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उसी नदी के तट पर इन्द्र, विश्वेदेव, मरुद्गण, गन्धर्व, अप्सराएँ, द्वैपायन व्यास, शुकदेव, मधुसूदन, श्रीकृष्ण, यक्ष, राक्षस और पिशाच आदि सभी देवता तथा हजारों की संख्या में अन्य मनुष्य भी योग में निपुण हुए हैं। 19-20 1/2॥
 
Prajanath! On the banks of the same river, all the gods like Indra, Vishvedev, Marudgan, Gandharva, Apsaras, Dwaipayan Vyas, Shukdev, Madhusudan, Shri Krishna, Yaksha, Rakshas and Pishaach - these and many other men in thousands of numbers have become accomplished in Yoga. 19-20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)