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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 49: इन्द्रतीर्थ, रामतीर्थ, यमुनातीर्थ और आदित्यतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.49.10 
दत्त्वा च दानं विविधं नानारत्नसमन्वितम्।
सगोहस्तिकदासीकं साजावि गतवान् वनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
बहुमूल्य रत्न, गाय, हाथी, दास, दासियाँ, भेड़-बकरियाँ आदि अनेक प्रकार के उपहार अर्पित करने के बाद वह वन में चला गया।
 
After offering various kinds of gifts including precious stones, cows, elephants, slaves, maids and sheep and goats, he went to the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)