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mahabharat 9.48.66-67: महातपस्वी ऋषि भारद्वाज ने उसके जन्म आदि सभी संस्कार संपन्न किए और ऋषियों की उपस्थिति में उसका नाम श्रुतवती रखा। फिर वे उस कन्या को अपने आश्रम में छोड़कर हिमालय के वन में चले गए।   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  9.48.66-67 
तस्यास्तु जातकर्मादि कृत्वा सर्वं तपोधन:॥ ६६॥
नाम चास्या: स कृतवान् भरद्वाजो महामुनि:।
श्रुतावतीति धर्मात्मा देवर्षिगणसंसदि।
स्वे च तामाश्रमे न्यस्य जगाम हिमवद्वनम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी ऋषि भारद्वाज ने उसके जन्म आदि सभी संस्कार संपन्न किए और ऋषियों की उपस्थिति में उसका नाम श्रुतवती रखा। फिर वे उस कन्या को अपने आश्रम में छोड़कर हिमालय के वन में चले गए।
 
The great sage Bharadwaj, a man of great penance, performed all the rituals of her birth and other ceremonies and named her Shrutavati in the presence of the sages. Then he left the girl in his ashram and went to the Himalayan forests.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)