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mahabharat 9.48.60-61: राजन! भरतश्रेष्ठ! वज्रधारी इन्द्र के चले जाने पर वहाँ पवित्र सुगन्ध वाले दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी और देवदुन्दुभियाँ बड़े शब्द करती हुई बजने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 60-61
 
 
श्लोक  9.48.60-61 
गते वज्रधरे राजंस्तत्र वर्षं पपात ह॥ ६०॥
पुष्पाणां भरतश्रेष्ठ दिव्यानां पुण्यगन्धिनाम्।
देवदुन्दुभयश्चापि नेदुस्तत्र महास्वना:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
राजन! भरतश्रेष्ठ! वज्रधारी इन्द्र के चले जाने पर वहाँ पवित्र सुगन्ध वाले दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी और देवदुन्दुभियाँ बड़े शब्द करती हुई बजने लगीं।
 
Rajan! Bharatshrestha! After the departure of the thunderbolt-wielding Indra, divine flowers with sacred fragrance started raining there and the Devudundubhis, making great noises, started ringing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)