Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.48.58-59h: जो मनुष्य एकाग्र मन से इस पवित्र स्थान में एक रात निवास करता है, वह यहाँ स्नान करके शरीर त्यागकर उन पवित्र लोकों को प्राप्त होता है, जो अन्य लोगों के लिए अत्यंत दुर्लभ हैं।॥58 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  9.48.58-59h 
यस्त्वेकां रजनीं तीर्थं वत्स्यते सुसमाहित:॥ ५८॥
स स्नात्वा प्राप्स्यते लोकान् देहन्यासात् सुदुर्लभान्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य एकाग्र मन से इस पवित्र स्थान में एक रात निवास करता है, वह यहाँ स्नान करके शरीर त्यागकर उन पवित्र लोकों को प्राप्त होता है, जो अन्य लोगों के लिए अत्यंत दुर्लभ हैं।॥58 1/2॥
 
Whoever stays in this holy place with concentrated mind for one night, after taking a bath here and giving up his body, will go to those holy worlds, which are very rare for others.'॥ 58 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)