Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.48.54-55: हे कठोर व्रत करने वाले श्रेष्ठ पुरुष! इस प्रकार शुद्ध हृदय वाली अरुन्धती देवी ने यहाँ परम सिद्धि प्राप्त की थी, जैसे तुमने मेरे लिए तप करके सिद्धि प्राप्त की है। भद्रे! तुमने इस व्रत में विशेष समर्पण किया है। 54-55॥ | mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सिद्धि: परा प्राप्ता अरुन्धत्या विशुद्धया॥ ५४॥
यथा त्वया महाभागे मदर्थं संशितव्रते।
विशेषो हि त्वया भद्रे व्रते ह्यस्मिन् समर्पित:॥ ५५॥
अनुवाद
हे कठोर व्रत करने वाले श्रेष्ठ पुरुष! इस प्रकार शुद्ध हृदय वाली अरुन्धती देवी ने यहाँ परम सिद्धि प्राप्त की थी, जैसे तुमने मेरे लिए तप करके सिद्धि प्राप्त की है। भद्रे! तुमने इस व्रत में विशेष समर्पण किया है। 54-55॥
O great one who observes a strict fast! In this way the pure-hearted Arundhati Devi had attained supreme perfection here, just as you have attained perfection by doing penance for me. Bhadre! You have made a special surrender in this fast. 54-55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥