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mahabharat 9.48.52-53h: तब महादेवजी ने उस तपस्वी से कहा - 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो)। तब सप्तर्षियों ने उसकी स्तुति की। तत्पश्चात् महादेवजी अपने लोक को चले गए। 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  9.48.52-53h 
एवमस्त्विति तां देव: प्रत्युवाच तपस्विनीम्॥ ५२॥
सप्तर्षिभि: स्तुतो देवस्ततो लोकं ययौ तदा।
 
 
अनुवाद
तब महादेवजी ने उस तपस्वी से कहा - 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो)। तब सप्तर्षियों ने उसकी स्तुति की। तत्पश्चात् महादेवजी अपने लोक को चले गए। 52 1/2॥
 
Then Mahadevji said to that ascetic - 'Evamastu' (may it be so). Then the seven sages praised him. After that Mahadevji went to his world. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)