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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  9.48.5 
तस्यास्तु तेन वृत्तेन तमसा च विशाम्पते।
भक्त्या च भगवान् प्रीत: परया पाकशासन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! भगवान् पक्षासन (इन्द्र) उनके आचरण, तप और भक्ति से बहुत प्रसन्न हुए।
 
Prajanath! Lord Pakshasan (Indra) was very pleased with his conduct, penance and devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)