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mahabharat 9.48.47: उन्होंने कहा - हे ब्राह्मणों! तुमने हिमालय के शिखर पर रहकर जो तप किया है और अरुन्धती ने यहाँ रहकर जो तप किया है, इन दोनों में कोई समानता नहीं है (अरुन्धती का तप सर्वश्रेष्ठ है)।॥47॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.48.47 
भवद्भिर्हिमवत्पृष्ठे यत् तप: समुपार्जितम्।
अस्याश्च यत् तपो विप्रा न समं सन्मतं मम॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा - हे ब्राह्मणों! तुमने हिमालय के शिखर पर रहकर जो तप किया है और अरुन्धती ने यहाँ रहकर जो तप किया है, इन दोनों में कोई समानता नहीं है (अरुन्धती का तप सर्वश्रेष्ठ है)।॥47॥
 
‘He said, ‘O Brahmins! The penance you have performed while staying on the peak of the Himalayas and the penance Arundhati has performed while staying here, there is no similarity between these two (Arundhati's penance is the best).॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)