Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.48.44-45: तत्पश्चात् सप्त ऋषि हिमालय पर्वत से फल लेकर वहाँ आये। उस समय भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर अरुन्धती से कहा - 'धर्मज्ञ! अब तुम पहले की भाँति इन ऋषियों के पास जाओ! धर्म को जानने वाली देवी! मैं तुम्हारे तप और नियम से अत्यन्त प्रसन्न हूँ। 44-45॥ | mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् सप्त ऋषि हिमालय पर्वत से फल लेकर वहाँ आये। उस समय भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर अरुन्धती से कहा - 'धर्मज्ञ! अब तुम पहले की भाँति इन ऋषियों के पास जाओ! धर्म को जानने वाली देवी! मैं तुम्हारे तप और नियम से अत्यन्त प्रसन्न हूँ। 44-45॥
After that the seven sages came there with fruits from the Himalayan Mountains. At that time Lord Shankar became pleased and said to Arundhati - 'Dharmagya! Now you go to these sages like before! Goddess who knows religion! I am very pleased with your penance and rules. 44-45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥