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श्लोक  9.48.4 
समास्तस्या व्यतिक्रान्ता बह्वॺ: कुरुकुलोद्वह।
चरन्त्या नियमांस्तां स्तान् स्त्रीभिस्तीव्रान् सुदुश्चरान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुवंश रत्न! श्रुतावती ने वहाँ अनेक वर्षों तक उन कठोर नियमों का पालन किया, जिनका पालन करना स्त्रियों के लिए अत्यन्त कठिन और असहनीय है।
 
O jewel of the Kuru clan! Shrutavati spent many years there following those strict rules which are extremely difficult and unbearable for women to follow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)