Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.48.30-31: इसके बाद श्रेष्ठ इन्द्र ने दृढ़तापूर्वक उत्तम व्रत का पालन करने वाली कन्या से कहा - 'शुभकामना! मैं तुम्हारे तप, नियमपालन और भक्ति से अत्यन्त संतुष्ट हूँ। अतः कल्याणी! तुम्हारे मन की अभीष्ट कामना पूर्ण होगी। महाभागे! तुम इस शरीर को त्यागकर मेरे साथ स्वर्ग में रहोगी। 30-31॥ | mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उवाच च सुरश्रेष्ठस्तां कन्यां सुदृढव्रताम्।
प्रीतोऽस्मि ते शुभे भक्त्या तपसा नियमेन च॥ ३०॥
तस्माद् योऽभिमत: काम: स ते सम्पत्स्यते शुभे।
देहं त्यक्त्वा महाभागे त्रिदिवे मयि वत्स्यसि॥ ३१॥
अनुवाद
इसके बाद श्रेष्ठ इन्द्र ने दृढ़तापूर्वक उत्तम व्रत का पालन करने वाली कन्या से कहा - 'शुभकामना! मैं तुम्हारे तप, नियमपालन और भक्ति से अत्यन्त संतुष्ट हूँ। अतः कल्याणी! तुम्हारे मन की अभीष्ट कामना पूर्ण होगी। महाभागे! तुम इस शरीर को त्यागकर मेरे साथ स्वर्ग में रहोगी। 30-31॥
After this, the best Indra said to the girl who firmly observed the best fast - 'Good luck! I am very satisfied with your penance, rule following and devotion. So Kalyani! The desired desire of your mind will be fulfilled. Mahabhage! You will leave this body and stay with me in heaven. 30-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥