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mahabharat 9.48.3: वह भामिनी वहाँ अनेक नियमों का पालन करते हुए घोर तपस्या कर रही थी। उसने निश्चय कर लिया था कि उसकी तपस्या का एकमात्र उद्देश्य यह है कि देवराज इंद्र उसके पति बनें।   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.48.3 
तपश्चचार सात्युग्रं नियमैर्बहुभिर्वृता।
भर्ता मे देवराज: स्यादिति निश्चित्य भामिनी॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह भामिनी वहाँ अनेक नियमों का पालन करते हुए घोर तपस्या कर रही थी। उसने निश्चय कर लिया था कि उसकी तपस्या का एकमात्र उद्देश्य यह है कि देवराज इंद्र उसके पति बनें।
 
That Bhaamini was performing a very severe penance there by following many rules. She had decided the sole purpose of her penance was that Devraja Indra should be her husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)