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श्लोक  9.48.28 
तस्यास्तु चरणौ वह्निर्ददाह भगवान् स्वयम्।
न च तस्या मनोदु:खं स्वल्पमप्यभवत् तदा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भगवान अग्नि ने स्वयं उसके दोनों पैर जला दिए, फिर भी उसे उस समय किंचितमात्र भी पीड़ा नहीं हुई। 28.
 
Lord Agni himself burnt both his legs, yet he did not feel even the slightest pain at that time. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)