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mahabharat 9.48.22: उसने जो भी ईंधन इकट्ठा किया था, वह सब अग्नि में जल गया। तब यह देखकर कि अग्नि में ईंधन नहीं है, उसने अपने शरीर को जलाना आरम्भ कर दिया॥22॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.48.22 
हुताशनेन दग्धश्च यस्तस्या: काष्ठसंचय:।
अकाष्ठमग्निं सा दृष्ट्वा स्वशरीरमथादहत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उसने जो भी ईंधन इकट्ठा किया था, वह सब अग्नि में जल गया। तब यह देखकर कि अग्नि में ईंधन नहीं है, उसने अपने शरीर को जलाना आरम्भ कर दिया॥22॥
 
All the fuel he had stored up was burnt in the fire. Then seeing that the fire was without fuel, he began to burn his own body.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)