Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.48.19-20: तत्पश्चात् उस तपस्विनी ने, जो सदाचार से सम्पन्न और थकान से रहित थी, चुपचाप उन फलों को अग्नि में डाल दिया। हे राजन! तब उस महापुण्यवती राजकुमारी ने बड़ी तत्परता से उन फलों को पकाना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  9.48.19-20 
तत: प्रतप्ता सा राजन् वाग्यता विगतक्लमा॥ १९॥
तत्परा शुचिसंवीता पावके समधिश्रयत्।
अपचद् राजशार्दूल बदराणि महाव्रता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस तपस्विनी ने, जो सदाचार से सम्पन्न और थकान से रहित थी, चुपचाप उन फलों को अग्नि में डाल दिया। हे राजन! तब उस महापुण्यवती राजकुमारी ने बड़ी तत्परता से उन फलों को पकाना आरम्भ कर दिया।
 
King! Thereafter that ascetic lady, endowed with good hygiene and free from fatigue, silently put those fruits on the fire. O great king! Then that great virtuous princess started cooking those berry fruits with great promptness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)