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mahabharat 9.48.10: तपोधन! मुझे अपने व्रत, नियम और तप के द्वारा त्रिभुवन सम्राट इन्द्र को संतुष्ट करना है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.48.10 
व्रतैश्च नियमैश्चैव तपसा च तपोधन।
शक्रस्तोषयितव्यो वै मया त्रिभुवनेश्वर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तपोधन! मुझे अपने व्रत, नियम और तप के द्वारा त्रिभुवन सम्राट इन्द्र को संतुष्ट करना है॥10॥
 
Tapodhan! I have to satisfy Lord Indra, the Tribhuvan Emperor, through my fasts, rules and penance. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)