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mahabharat 9.48.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! पहले कहा जा चुका है कि वहाँ से बलरामजी बादरपचान नामक उत्तम तीर्थस्थान पर गए, जहाँ तपस्वी और सिद्ध पुरुष विचरण करते हैं और जहाँ पूर्वकाल में भारद्वाज की ब्रह्मचारिणी श्रुतावती नामक उत्तम व्रतों का पालन करने वाली कुमारी कन्या रहती थी, जिसका रूप और सौन्दर्य संसार में कहीं भी उपमा योग्य नहीं था। ॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 9.48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 48: बदरपाचनतीर्थकी महिमाके प्रसंगमें श्रुतावती और अरुन्धतीके तपकी कथा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  9.48.1-2 
वैशम्पायन उवाच
ततस्तीर्थवरं रामो ययौ बदरपाचनम्।
तपस्विसिद्धचरितं यत्र कन्या धृतव्रता॥ १॥
भरद्वाजस्य दुहिता रूपेणाप्रतिमा भुवि।
श्रुतावती नाम विभो कुमारी ब्रह्मचारिणी॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! पहले कहा जा चुका है कि वहाँ से बलरामजी बादरपचान नामक उत्तम तीर्थस्थान पर गए, जहाँ तपस्वी और सिद्ध पुरुष विचरण करते हैं और जहाँ पूर्वकाल में भारद्वाज की ब्रह्मचारिणी श्रुतावती नामक उत्तम व्रतों का पालन करने वाली कुमारी कन्या रहती थी, जिसका रूप और सौन्दर्य संसार में कहीं भी उपमा योग्य नहीं था। ॥1-2॥
 
Vaishmpayana says: O King! It has been said earlier that from there Balarama went to the best pilgrimage place called Badar Pachan, where ascetics and accomplished souls roam and where in earlier times Bharadwaj's celibate daughter Shrutavati, a virgin girl who observed excellent vows and whose form and beauty had no comparison anywhere in the world, used to live. ॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)