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mahabharat 9.47.9-10h: तब वरुण ने उन देवताओं से कहा - ‘एवमस्तु’। इस प्रकार उनकी अनुमति पाकर समस्त देवताओं ने एकत्र होकर शास्त्रीय विधि के अनुसार समुद्र के निवासी वरुण को जलका का राजा बना दिया। 9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.47.9-10h 
एवमस्त्विति तान् देवान् वरुणो वाक्यमब्रवीत्।
समागम्य तत: सर्वे वरुणं सागरालयम्॥ ९॥
अपां पतिं प्रचक्रुर्हि विधिदृष्टेन कर्मणा।
 
 
अनुवाद
तब वरुण ने उन देवताओं से कहा - ‘एवमस्तु’। इस प्रकार उनकी अनुमति पाकर समस्त देवताओं ने एकत्र होकर शास्त्रीय विधि के अनुसार समुद्र के निवासी वरुण को जलका का राजा बना दिया। 9 1/2॥
 
Then Varun said to those gods – ‘Evamastu’. Thus, after getting his permission, all the gods gathered together and made Varuna, the resident of the sea, the king of Jalka according to the classical method. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)