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श्लोक  9.47.7-8 
वासश्च ते सदा देव सागरे मकरालये॥ ७॥
समुद्रोऽयं तव वशे भविष्यति नदीपति:।
सोमेन सार्धं च तव हानिवृद्धी भविष्यत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे देव! मकरलय सागर सदैव आपका निवास स्थान रहेगा और यह नाड़ीपति सागर सदैव आपके अधीन रहेगा। चन्द्रमा के साथ आपकी भी हानि और वृद्धि होगी।
 
‘O God! Makaralay ocean will always be your abode and this Nadipati ocean will always be under your control. You will also suffer loss and growth along with the moon.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)