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mahabharat 9.47.3: कुमार के राज्याभिषेक तथा उनके द्वारा राक्षसों के वध की कथा सुनकर मुझे बहुत आनन्द आया है और एक बार फिर इस विषय को सुनने की उत्सुकता मेरे मन में जागृत हो गई है।   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.47.3 
अभिषेकं कुमारस्य दैत्यानां च वधं तथा।
श्रुत्वा मे परमा प्रीतिर्भूय: कौतूहलं हि मे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुमार के राज्याभिषेक तथा उनके द्वारा राक्षसों के वध की कथा सुनकर मुझे बहुत आनन्द आया है और एक बार फिर इस विषय को सुनने की उत्सुकता मेरे मन में जागृत हो गई है।
 
I have felt great joy in hearing the story of the coronation of the Kumar and the killing of the demons by him, and once again the eagerness to hear about this topic has been aroused in my mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)