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mahabharat 9.47.26-27h: नरेश्वर! वहाँ धन-संपत्ति उनके पास पहुँच गई थी। नरश्रेष्ठ! फरसेधारी बलरामजी उस तीर्थ में गए और स्नान करके विधिपूर्वक ब्राह्मणों को धन दान किया। 26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  9.47.26-27h 
तत्रस्थमेव तं राजन् धनानि निधयस्तथा।
उपतस्थुर्नरश्रेष्ठ तत् तीर्थं लाङ्गली बल:॥ २६॥
गत्वा स्नात्वा च विधिवद् ब्राह्मणेभ्यो धनं ददौ।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! वहाँ धन-संपत्ति उनके पास पहुँच गई थी। नरश्रेष्ठ! फरसेधारी बलरामजी उस तीर्थ में गए और स्नान करके विधिपूर्वक ब्राह्मणों को धन दान किया। 26 1/2॥
 
Nareshwar! The money and funds had reached him there. Narashrestha! Balram, the wielder of the halberd, went to that pilgrimage and after bathing, donated money to the Brahmins in a ritual manner. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)