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mahabharat 9.47.24-25: राजा! उस तीर्थ में स्नान करके और नाना प्रकार की सम्पत्ति दान करके बलरामजी कुबेरतीर्थ गए, जहाँ भगवान कुबेर ने घोर तपस्या करके कोषाध्यक्ष का पद प्राप्त किया था।   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.47.24-25 
तत्र स्नात्वा च दत्त्वा च वसूनि विविधानि च॥ २४॥
कौबेरं प्रययौ तीर्थं तत्र तप्त्वा महत्तप:।
धनाधिपत्यं सम्प्राप्तो राजन्नैलविल: प्रभु:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा! उस तीर्थ में स्नान करके और नाना प्रकार की सम्पत्ति दान करके बलरामजी कुबेरतीर्थ गए, जहाँ भगवान कुबेर ने घोर तपस्या करके कोषाध्यक्ष का पद प्राप्त किया था।
 
King! After taking bath in that pilgrimage and donating various kinds of wealth, Balarama went to Kubertirtha, where Lord Kuber had performed severe penance and obtained the position of treasurer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)