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mahabharat 9.47.20-21h: व्याघ्र! इन्द्रसहित सभी देवता बृहस्पतिदेव को आगे करके अग्निदेव के पास आये और उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुए॥20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  9.47.20-21h 
देवा: सर्वे नरव्याघ्र बृहस्पतिपुरोगमा:॥ २०॥
ज्वलनं तं समासाद्य प्रीताभूवन् सवासवा:।
 
 
अनुवाद
व्याघ्र! इन्द्रसहित सभी देवता बृहस्पतिदेव को आगे करके अग्निदेव के पास आये और उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुए॥20 1/2॥
 
Tiger! All the gods including Indra came near Agnidev with Jupiter in front and were very happy to see him. 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)