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mahabharat 9.47.19-20h: तत्पश्चात् देवता अग्नितीर्थ में आये और उन्होंने अग्निदेव को शमी वृक्ष के गर्भ में यथायोग्य निवास करते देखा।   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.47.19-20h 
ततोऽग्नितीर्थमासाद्य शमीगर्भस्थमेव हि॥ १९॥
ददृशुर्ज्वलनं तत्र वसमानं यथाविधि।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवता अग्नितीर्थ में आये और उन्होंने अग्निदेव को शमी वृक्ष के गर्भ में यथायोग्य निवास करते देखा।
 
Thereafter the Gods came to Agnitirtha and saw Agni residing in the womb of Shami tree in a proper manner. 191/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)