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mahabharat 9.47.10-11h: जलचरों के स्वामी वरुण की पूजा करके सभी देवता अपने-अपने स्थान को चले गए।   |   mahabharat अध्याय 9.47: वरुणका अभिषेक तथा अग्नितीर्थ, ब्रह्मयोनि और कुबेरतीर्थकी उत्पत्तिका प्रसंग   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.47.10-11h 
अभिषिच्य ततो देवा वरुणं यादसां पतिम्॥ १०॥
जग्मु: स्वान्येव स्थानानि पूजयित्वा जलेश्वरम्।
 
 
अनुवाद
जलचरों के स्वामी वरुण की पूजा करके सभी देवता अपने-अपने स्थान को चले गए।
 
After worshipping Varuna, the lord of the aquatic animals, all the gods went back to their respective places. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)