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mahabharat 9.46.94-95h: तत्पश्चात देवताओं के शत्रुओं का वध करके तथा देवताओं की सेवा करके भगवान स्कन्ददेव बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 94-95h
 
 
श्लोक  9.46.94-95h 
तत: स भगवान् देवो निहत्य विबुधद्विष:॥ ९४॥
सभाज्यमानो विबुधै: परं हर्षमवाप ह।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात देवताओं के शत्रुओं का वध करके तथा देवताओं की सेवा करके भगवान स्कन्ददेव बहुत प्रसन्न हुए।
 
Thereafter, Lord Skanddev became very happy after killing the enemies of the gods and serving the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)