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mahabharat 9.46.91-92h: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अग्नि के पराक्रमी पुत्र कार्तिकेय ने अनेक रूपों में प्रकट होकर अपनी शक्ति से क्रौंच पर्वत को छेद दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 91-92h
 
 
श्लोक  9.46.91-92h 
बिभेद क्रौञ्चं शक्त्या च पावकि: परवीरहा॥ ९१॥
बहुधा चैकधा चैव कृत्वाऽऽत्मानं महाबल:।
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अग्नि के पराक्रमी पुत्र कार्तिकेय ने अनेक रूपों में प्रकट होकर अपनी शक्ति से क्रौंच पर्वत को छेद दिया।
 
The mighty son of Agni, Kartikeya, the slayer of enemy warriors, manifested himself in one and many forms and pierced the Krauncha mountain with his power.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)