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mahabharat 9.46.76-77: महाराज! जब शत्रुओं का संहार होने लगा, तब कुमार के अनुयायी जोर-जोर से गर्जना करने लगे, जिसकी ध्वनि दसों दिशाओं में गूँजने लगी। इतना ही नहीं, वे हर्ष के मारे नाचने, कूदने और जोर-जोर से हँसने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 76-77
 
 
श्लोक  9.46.76-77 
तथाकुर्वन्त विपुलं नादं वध्यत्सु शत्रुषु॥ ७६॥
कुमारानुचरा राजन् पूरयन्तो दिशो दश।
ननृतुश्च ववल्गुश्च जहसुश्च मुदान्विता:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब शत्रुओं का संहार होने लगा, तब कुमार के अनुयायी जोर-जोर से गर्जना करने लगे, जिसकी ध्वनि दसों दिशाओं में गूँजने लगी। इतना ही नहीं, वे हर्ष के मारे नाचने, कूदने और जोर-जोर से हँसने लगे।
 
King! When the enemies started getting killed, the followers of Kumar started roaring loudly, which echoed in all the ten directions. Not only this, they started dancing, jumping and laughing loudly in joy. 76-77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)