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mahabharat 9.46.71: हे मनुष्यों के स्वामी! जैसे प्रलय के समय बड़े भयंकर शब्द के साथ अत्यन्त भयंकर वज्र पृथ्वी पर गिरते हैं, वैसे ही उस समय भी भयंकर गड़गड़ाहट के साथ वज्र गिरने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  9.46.71 
संह्रादयन्तश्च तथा निर्घाताश्चापतन् क्षितौ।
यथान्तकालसमये सुघोरा: स्युस्तथा नृप॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जैसे प्रलय के समय बड़े भयंकर शब्द के साथ अत्यन्त भयंकर वज्र पृथ्वी पर गिरते हैं, वैसे ही उस समय भी भयंकर गड़गड़ाहट के साथ वज्र गिरने लगे।
 
O Lord of men! Just as at the time of apocalypse, very terrible thunderbolts fall on the earth with a loud rumbling sound, similarly at that time too, thunderbolts started falling with a terrible rumbling sound.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)