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mahabharat 9.46.65-66: वह सेना अत्यंत भयंकर थी। उसके हाथों में भाले, गदाएँ, जलती हुई लकड़ियाँ, गदाएँ, मूसल, बाण, भाले और तलवारें थीं। सारी सेना विचित्र आभूषणों और कवचों से सुसज्जित थी और गर्वित सिंह के समान गर्जना कर रही थी। कुमार कार्तिकेय उस सेना के आगे गर्जना करते हुए युद्ध के लिए निकले।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 65-66
 
 
श्लोक  9.46.65-66 
स तया भीमया देव: शूलमुद्‍गरहस्तया।
ज्वलितालातधारिण्या चित्राभरणवर्मया॥ ६५॥
गदामुसलनाराचशक्तितोमरहस्तया।
दृप्तसिंहनिनादिन्या विनद्य प्रययौ गुह:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
वह सेना अत्यंत भयंकर थी। उसके हाथों में भाले, गदाएँ, जलती हुई लकड़ियाँ, गदाएँ, मूसल, बाण, भाले और तलवारें थीं। सारी सेना विचित्र आभूषणों और कवचों से सुसज्जित थी और गर्वित सिंह के समान गर्जना कर रही थी। कुमार कार्तिकेय उस सेना के आगे गर्जना करते हुए युद्ध के लिए निकले।
 
That army was very fearsome. It was holding spears, maces, burning wood, maces, pestles, arrows, spears and swords in its hands. The entire army was decked with strange ornaments and armours and was roaring like a proud lion. Kumar Kartikeya set out for the war roaring in front of that army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)