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mahabharat 9.46.57-58: तत्पश्चात् देवताओं और नाना प्रकार के भूतों के समूह ने शान्त मन से तुरही, अनेक शंख, झांझ, सारस, गौओं के सींग, आदमबर, गोमुख और बड़े शब्द वाले नगाड़े बजाने आरम्भ किये।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 57-58
 
 
श्लोक  9.46.57-58 
ततो देवनिकायास्ते नानाभूतगणास्तथा।
वादयामासुरव्यग्रा भेरी: शङ्खांश्च पुष्कलान्॥ ५७॥
पटहान् झर्झरांश्चैव क्रकचान् गोविषाणकान्।
आडम्बरान् गोमुखांश्च डिण्डिमांश्च महास्वनान्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं और नाना प्रकार के भूतों के समूह ने शान्त मन से तुरही, अनेक शंख, झांझ, सारस, गौओं के सींग, आदमबर, गोमुख और बड़े शब्द वाले नगाड़े बजाने आरम्भ किये।
 
Thereafter the group of gods and various kinds of ghosts, with calm minds, began to play the trumpet, many conches, cymbals, cranes, cow horns, Aadambaras, Gomukhs and the loud sounding drums. 57-58.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)