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mahabharat 9.46.54-55h: तत्पश्चात् कुमार कार्तिकेय अपने गणों तथा मातृकाओं के साथ भगवान् को प्रसन्न करके दैत्यों का नाश करने के लिए चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  9.46.54-55h 
तत: पारिषदैश्चैव मातृभिश्च समन्वित:॥ ५४॥
ययौ दैत्यविनाशाय ह्लादयन् सुरपुङ्गवान्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुमार कार्तिकेय अपने गणों तथा मातृकाओं के साथ भगवान् को प्रसन्न करके दैत्यों का नाश करने के लिए चल पड़े।
 
Thereafter, along with his associates and the Matrikas, Kumar Kartikeya, having pleased the Supreme Lords, set out to destroy the demons. 54 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)