गरुडो दयितं पुत्रं मयूरं चित्रबर्हिणम्।
अरुणस्ताम्रचूडं च प्रददौ चरणायुधम्॥ ५१॥
अनुवाद
गरुड़ ने अपने प्रिय पुत्र मयूर को, जो विचित्र पंखों से सुशोभित था, भेंट किया। अरुण ने अपने लाल शिखा वाले पुत्र ताम्रचूड़ (मुर्गा) को, जिसका पैर उसका हथियार था, भेंट किया।
Garuda presented his beloved son Mayur, adorned with strange feathers. Arun presented his son Tamrachud (cock) with red crest, whose foot was his weapon.