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mahabharat 9.46.51: गरुड़ ने अपने प्रिय पुत्र मयूर को, जो विचित्र पंखों से सुशोभित था, भेंट किया। अरुण ने अपने लाल शिखा वाले पुत्र ताम्रचूड़ (मुर्गा) को, जिसका पैर उसका हथियार था, भेंट किया।   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  9.46.51 
गरुडो दयितं पुत्रं मयूरं चित्रबर्हिणम्।
अरुणस्ताम्रचूडं च प्रददौ चरणायुधम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ ने अपने प्रिय पुत्र मयूर को, जो विचित्र पंखों से सुशोभित था, भेंट किया। अरुण ने अपने लाल शिखा वाले पुत्र ताम्रचूड़ (मुर्गा) को, जिसका पैर उसका हथियार था, भेंट किया।
 
Garuda presented his beloved son Mayur, adorned with strange feathers. Arun presented his son Tamrachud (cock) with red crest, whose foot was his weapon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)