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mahabharat 9.46.50: गंगाजी ने प्रसन्नतापूर्वक कुमार को एक दिव्य एवं उत्तम कमण्डलु दिया, जो अमृत प्रकट करने वाला था। बृहस्पतिदेव ने दण्ड दिया ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  9.46.50 
गङ्गा कमण्डलुं दिव्यममृतोद्भवमुत्तमम्।
ददौ प्रीत्या कुमाराय दण्डं चैव बृहस्पति:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
गंगाजी ने प्रसन्नतापूर्वक कुमार को एक दिव्य एवं उत्तम कमण्डलु दिया, जो अमृत प्रकट करने वाला था। बृहस्पतिदेव ने दण्ड दिया ॥50॥
 
Ganga happily gave Kumar a divine and excellent Kamandalu, which was supposed to reveal nectar. Jupiter gave punishment. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)