श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 47-48
 
 
श्लोक  9.46.47-48 
उग्रां नानाप्रहरणां तपोवीर्यबलान्विताम्।
अजेयां स्वगणैर्युक्तां नाम्ना सेनां धनंजयाम्॥ ४७॥
रुद्रतुल्यबलैर्युक्तां योधानामयुतैस्त्रिभि:।
न सा विजानाति रणात् कदाचिद् विनिवर्तितुम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वह प्रचण्ड सेना धनंजय नाम से विख्यात थी। उसके सभी योद्धा नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र, तप, बल और पराक्रम से सुसज्जित थे। रुद्र के समान पराक्रमी तीस हजार रुद्रगणों से युक्त वह सेना शत्रुओं के लिए अजेय थी। वह युद्ध से पीछे हटना कभी नहीं जानती थी।
 
That fierce army was famous by the name of Dhananjay. All the soldiers in it were equipped with various types of weapons, arms, penance, strength and valour. That army consisting of thirty thousand Rudraganas as powerful as Rudra was invincible for the enemies. It never knew how to retreat from the battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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