श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  9.46.43-44h 
नानाविचित्रवेषाश्च नानाभाषास्तथैव च।
एते चान्ये च बहवो गणा: शत्रुभयंकरा:॥ ४३॥
अनुजग्मुर्महात्मानं त्रिदशेन्द्रस्य सम्मते।
 
 
अनुवाद
उनकी वेश-भूषा विविध एवं विचित्र है। वे अनेक भाषाएँ बोलते हैं। शत्रुओं को भयभीत करने वाले ये तथा अन्य अनेक गण, देवेन्द्र की सलाह से महात्मा स्कन्द के पीछे चल पड़े।
 
Their attire is varied and strange. They speak many languages. These and many other Ganas, who frighten the enemies, started following Mahatma Skanda with the advice of Devendra. 43 1/2.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd