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mahabharat 9.46.40: युद्ध के समय वह शत्रुओं को सदैव भयभीत करती है। वह इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती है और वायु के समान वेगवान है ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  9.46.40 
शत्रूणां विग्रहे नित्यं भयदास्ता भवन्त्युत।
कामरूपधराश्चैव जवे वायुसमास्तथा॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के समय वह शत्रुओं को सदैव भयभीत करती है। वह इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती है और वायु के समान वेगवान है ॥40॥
 
When a war breaks out, she is always frightening for the enemies. She can take any form she wishes and is as swift as the wind. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)