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mahabharat 9.46.31-32: भरतनन्दन! उसके नख, दाँत और मुख सब विशाल हैं। वह बलवान, सुन्दर, यौवनवान और वस्त्राभूषणों से विभूषित है। वह अत्यन्त तेजस्वी है। वह अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर लेती है ॥31-32॥   |   mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  9.46.31-32 
दीर्घनख्यो दीर्घदन्त्यो दीर्घतुण्ड्यश्च भारत॥ ३१॥
सबला मधुराश्चैव यौवनस्था: स्वलंकृता:।
माहात्म्येन च संयुक्ता: कामरूपधरास्तथा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! उसके नख, दाँत और मुख सब विशाल हैं। वह बलवान, सुन्दर, यौवनवान और वस्त्राभूषणों से विभूषित है। वह अत्यन्त तेजस्वी है। वह अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर लेती है ॥31-32॥
 
Bharatanandan! Her nails, teeth and face are all huge. She is strong, beautiful, youthful and adorned with clothes and ornaments. She is very glorious. She assumes any form according to her wish. ॥ 31-32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)