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mahabharat 9.46.3-30h: कुरुवंशी! भरतकुलनन्दन! राजेंद्र! वे नाम इस प्रकार हैं- प्रभावती, विशालाक्षी, पलिता, गोस्तानी, श्रीमती, बहुला, बहुपुत्रिका, अप्सु जाता, गोपाली, बृहदम्बलिका, जयावती, मालतिका, ध्रुवरत्न, भाकिनी, वसुदामा, दामा, विशोका, नंदिनी, एकचूड़ा, महाचूड़ा, चक्रनेमि, उत्करिणी, जयत्सेना, कमलाक्षी, शोभना, शत्रुंजय, क्रोधन, शलभि, खारी। माधवी, शुभवक्त्र, तीर्थनेमि, गीताप्रिया, कल्याणी, रुद्ररोमा, अमिताशना, मेघस्वाना, भोगावती, सुभ्रू, कनकवती, अलताक्षी, वीरावती, विद्युजिह्वा, पद्मावती, सुनक्षत्र, कंदरा, बहुयोजना, संतानिका, कमला, महाबाला, सुदामा, बहुदामा, सुप्रभा, यशस्विनी, नृत्यप्रिया, शतोलुखलामेखला, शतघंटा, शतानंद, भगानंद, भाविनी, वपुष्मती, चंद्रसीता, भद्रकाली, ऋक्षंबिका, निष्कुटिका, वामा, चतर्ववासिनी, सुमंगला, स्वस्तिमती, बुद्धिकाम, जयप्रिया, धनदा, सुप्रसाद, भवादा, जलेश्वरी, आदि, भेदी, समेदी, वेतालजननी, कंदुतिकालिका, देवमित्र, वसुश्री, कोटरा, चित्रसेना, अचला, कुक्कुटिका, शंखालिका, शकुनिका, कुंडरिका, कौकुलिका, कुंभिका, शतोदरी, उत्क्रथिनी, जलेला, महावेगा, कंकना, मनोजवा, कंटकिनी, प्रघासा, पूतना, केशांत्री, त्रुटि, वामा, क्रोशना तदितप्रभा, मंदोदरी, मुंडी, कोटरा, मेघवाहिनी, सुभगा, लाम्बिनी, लांबा, ताम्रचूड़ा, विकासिनी, ऊर्ध्ववीनधारा, पिंगाक्षी, लोहमेखला, पृथुवस्त्र, मधुलिका, मधुकुम्भा, पक्षालिका, मटकुलिका, जरायु, जारगन्ना, ख्याता, दहदाहा, धमधामा, खंडखंडा, पूषाण, मणिकुट्टिका, अमोघ, लंबपयोधारा, वेणुविनाधारा, पिंगाक्षी, लोहमेखला, शशोलुकमुखी, कृष्णा, खरजंघा, महाजवा, शिशुमरमुखी, श्वेता, लोहिताक्षी, विभीषण, जटालिका, कामचारी, लोंगजिह्वा, बालोत्कटा, कालेहिका, वामनिका, मुकुता, लोहिताक्षी, महाकाय, हरिपिंद, एकत्वचा, सुकुसुमा, कृष्णकर्णी, क्षुरकर्णी, चतुष्कर्णी, कर्णप्रवर्ण, चतुष्पथनिकेता, गोकर्णी, महिषान्ना, खरकर्णी, महाकर्णी, भेरीस्वाना, महस्वाना, शंखश्रवा, कुंभश्रवा, भगद, महाबल, गण, सुगना, अभीति, कामदा, चतुष्पथ्रता, भूततीर्थ, अन्यगोचरी, पशुदा, विट्ठडा, सुखदा, महायशा, पयोदा, गोदा, महिषदा, सुविशाला, प्रतिष्ठा, सुप्रतिष्ठा, रोच्मना, सुरोचन, नौकार्णी, मुखकर्णी, विशिरा, मंथिनी, एकचंद्र, मेघकर्ण। मेघमाला और विरोचन. 3—29 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह