श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 46: मातृकाओंका परिचय तथा स्कन्ददेवकी रणयात्रा और उनके द्वारा तारकासुर, महिषासुर आदि दैत्योंका सेनासहित संहार  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  9.46.104 
एवं स भगवांस्तस्मिंस्तीर्थे दैत्यकुलान्तक:।
अभिषिक्तो महाराज देवसेनापति: सुरै:॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! इस प्रकार उस तीर्थ में देवताओं द्वारा दैत्यों के सेनापति भगवान स्कन्द का अभिषेक हुआ ॥104॥
 
Maharaj! In this way Lord Skanda, the commander of the demon destroyer, was anointed by the gods in that pilgrimage. 104॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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