Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.45.95: किसी के दो, किसी के तीन और किसी के सात जटाएँ थीं। किसी के माथे पर मोरपंख थे और किसी के मुकुट थे। किसी के सिर मुँड़े हुए थे और किसी के लंबे-लंबे जटाएँ थीं॥95॥ | mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिशिखा द्विशिखाश्चैव तथा सप्तशिखा: परे।
शिखण्डिनो मुकुटिनो मुण्डाश्च जटिलास्तथा॥ ९५॥
अनुवाद
किसी के दो, किसी के तीन और किसी के सात जटाएँ थीं। किसी के माथे पर मोरपंख थे और किसी के मुकुट थे। किसी के सिर मुँड़े हुए थे और किसी के लंबे-लंबे जटाएँ थीं॥95॥
Some had two, some three and some had seven tufts of hair. Some wore peacock feathers on their foreheads and some wore crowns. Some had shaven heads and some had long matted hair.॥ 95॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥