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mahabharat 9.45.77-78: जनमेजय! ये सभी पार्षद योगयुक्त, महामनस्वी और ब्राह्मणों से सदैव प्रेम करने वाले हैं। इनके अतिरिक्त पितामह ब्रह्माजी द्वारा दिए गए महापार्षद तथा अन्य हजारों बालक, युवा और वृद्ध पार्षद कुमार की सेवा में उपस्थित थे। 77-78॥   |   mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 77-78
 
 
श्लोक  9.45.77-78 
योगयुक्ता महात्मान: सततं ब्राह्मणप्रिया:।
पैतामहा महात्मानो महापारिषदाश्च ये॥ ७७॥
यौवनस्थाश्च बालाश्च वृद्धाश्च जनमेजय।
सहस्रश: पारिषदा: कुमारमवतस्थिरे॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! ये सभी पार्षद योगयुक्त, महामनस्वी और ब्राह्मणों से सदैव प्रेम करने वाले हैं। इनके अतिरिक्त पितामह ब्रह्माजी द्वारा दिए गए महापार्षद तथा अन्य हजारों बालक, युवा और वृद्ध पार्षद कुमार की सेवा में उपस्थित थे। 77-78॥
 
Janamejaya! All these councilors are Yogayukt, Mahaman and always love Brahmins. Apart from these, the great councilors given by Grandfather Brahmaji and thousands of other children, young and old councilors attended the service of Kumar. 77-78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)