Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.45.6-9h: विश्वेदेव, मरुद्गण, साध्यगण, पितृगण, गंधर्व, अप्सरा, यक्ष, राक्षस, नाग, असंख्य देवर्षि, ब्रह्मर्षि, वनवासी ऋषि, वालखिल्य, वायु पीकर जीवन जीने वाले ऋषि, सूर्य की किरणों को पीने वाले ऋषि, भृगु और अंगिरा के वंश में जन्मे महर्षि, महात्मा यतिगण, नाग, विद्याधर और गुणी योगसिद्ध ऋषि भी कार्तिकेय को घेरकर खड़े थे। 6—8 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वेदेव, मरुद्गण, साध्यगण, पितृगण, गंधर्व, अप्सरा, यक्ष, राक्षस, नाग, असंख्य देवर्षि, ब्रह्मर्षि, वनवासी ऋषि, वालखिल्य, वायु पीकर जीवन जीने वाले ऋषि, सूर्य की किरणों को पीने वाले ऋषि, भृगु और अंगिरा के वंश में जन्मे महर्षि, महात्मा यतिगण, नाग, विद्याधर और गुणी योगसिद्ध ऋषि भी कार्तिकेय को घेरकर खड़े थे। 6—8 1/2॥
Vishvedev, Marudgana, Sadhyagana, Pitrugana, Gandharva, Apsara, Yaksha, Rakshasa, Naga, innumerable Devarshi, Brahmarshi, forest dweller sage, Valakhilya, sage who lives by drinking air, sage who drinks the sun's rays, Maharishi born in the lineage of Bhrigu and Angira, Mahatma Yatigan, snakes, Vidyadhar and virtuous Yogsiddha sage also stood surrounding Kartikeya. 6—8 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥