श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  9.45.47-48h 
काञ्चनं च महात्मानं मेघमालिनमेव च॥ ४७॥
ददावनुचरो मेरुरग्निपुत्राय भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! मेरुना ने अग्निपुत्र स्कंद को महामना कंचन और मेघमाली नाम के दो सेवक प्रदान किये। 47 1/2.
 
Bharata! Meruna offered two attendants named Mahamana Kanchan and Meghmali to Agniputra Skanda. 47 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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