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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  9.45.30 
तत: प्रादादनुचरौ यम: कालोपमावुभौ।
उन्माथश्च प्रमाथश्च महावीर्यौ महाद्युती॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् यमराज ने उसे उन्मत्त और प्रमथ नाम के दो सेवक दिए। वे दोनों मृत्यु के समान शक्तिशाली और तेजस्वी थे।
 
Thereafter Yamaraja gave him two attendants named Unmath and Pramath. Both of them were as powerful and illustrious as death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)