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mahabharat 9.45.2-3: तत्पश्चात् कुमार कार्तिकेय हिमवान द्वारा प्रदत्त बहुमूल्य रत्नों से विभूषित तथा दिव्य रत्नजटित पवित्र सिंहासन पर विराजमान हुए। उस समय समस्त देवतागण विधिपूर्वक मंत्रोच्चार करते हुए समस्त शुभ वस्तुओं तथा अभिषेक सामग्री के साथ वहाँ उपस्थित हुए।   |   mahabharat अध्याय 9.45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 45: स्कन्दका अभिषेक और उनके महापार्षदोंके नाम, रूप आदिका वर्णन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  9.45.2-3 
ततो हिमवता दत्ते मणिप्रवरशोभिते।
दिव्यरत्नाचिते पुण्ये निषण्णं परमासने॥ २॥
सर्वमङ्गलसम्भारैर्विधिमन्त्रपुरस्कृतम्।
आभिषेचनिकं द्रव्यं गृहीत्वा देवतागणा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुमार कार्तिकेय हिमवान द्वारा प्रदत्त बहुमूल्य रत्नों से विभूषित तथा दिव्य रत्नजटित पवित्र सिंहासन पर विराजमान हुए। उस समय समस्त देवतागण विधिपूर्वक मंत्रोच्चार करते हुए समस्त शुभ वस्तुओं तथा अभिषेक सामग्री के साथ वहाँ उपस्थित हुए।
 
Thereafter, Kumar Kartikeya sat on the sacred throne decorated with precious gems given by Himavan and studded with divine jewels. At that time, all the gods came there with all the auspicious items and Abhishek material as per the rituals and chanting of mantras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)